Maharashtra Weekend Getaways

किताबों के गांव में आपका स्वागत है , यहां हर घर में बनी है लाइब्रेरी

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    हिल स्टेशन महाबलेश्वर की यात्रा अब तक लोग मौजमस्ती के लिए किया करते थे। हर किसीने महाराष्ट्र के महाबलेश्वर हिल स्टेशन को भेट दी होगी, फिर भी मेरा आपको यह कहना है कि, आप फिर एक बार और बार बार यहाँ जाएं, लेकिन भिलार गाँव को देखने और पढ़ने। जी हाँ पढ़ने! महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी कहे जानेवाले पुणे से महाबलेश्वर की ओर जाने वाले रास्ते में भिलार गांव है। महाराष्ट्र के सतारा जिले में महाबलेश्वर के नजदीक ये भिलार गाँव देश का पहला पुस्तक गाँव हैं। ये गाँव महाबलेश्वर हिलस्टेशन से 14 और हाइवे से 33 किलोमीटर दूर हैं और सुंदर पंचगनी पहाड़ी क्षेत्र से करीब 8 किलोमीटर दूर स्थित है। ‘स्ट्रॉबेरी विलेज’ यानी स्ट्रॉबेरी फल की खेती और उत्पादन के लिए मशहूर हो चुका ये गाँव अब पुस्तकों के रूप में भी जाना जाता है।
      मै आपको बताना चाहता हूँ की, यह ‘पुस्तकांचं गाँव’ परियोजना ब्रिटेन के वेल्स शहर के हे-ऑन-वे से प्रभावित है। इस बनने में करीब दो साल लगे और 4 मई को यह गांव लोगों के लिए खोला गया। यह गाँव उन लोगों के लिए स्वर्ग हैं, जिन्हें भाषा और साहित्य से प्रेम है। इस भिलार गांव की आबादी लगभग हजार से ज्यादा नहीं है, लेकिन पुस्तकों के लिए एक जुनून इस गांव की खासियत है। यह गांव अपने कई घरों में पुस्तकों के बड़े संग्रह के कारण तमाम लोगों के लिए ज्ञान का तीर्थ बन गया है। मैं दो दिन यहाँ रुका था, तो मैंने इस योजना के बारे में और गाँव के बारे में और कुछ अलग बातें जानने की कोशिश की। तो ये पता चला कि..
इस गाँव में पुस्तकें पढ़ने के लिए घर, लॉज, मंदिर, शाला सहित कुल 25 स्थान चुने गए हैं, जिनमें कथा, कविता, उपन्यास, संत साहित्य, प्रकृति, धर्म, महिला, बच्चों, इतिहास, पर्यावरण, लोक साहित्य, जीवन, चरित्र, आत्मकथा और दिवाली अंक सहित विभिन्न प्रकार की पुस्तकें मौजूद रहेंगे। इन लाइब्रेरीज की दीवारें भी काफी अट्रैक्टिव हैं जिनमें कविताएं, कला, साहित्य, लोकगीत, इतिहास और धर्म से जुड़ी बातों को उकेरा गया है। इसके लिए महाराष्ट्र ने 75 कलाकारों को नियुक्त किया था। 25 जगहों पर एक घर में एक विषय की पुस्तके होंगी।‌ इस तरह प्रत्येक घर में 400 से 450 किताबे होंगी और पूरे गाँव में 15000 किताबें उपलब्ध की जाएगी, जिसमें लगभग 2,000 किताबें बच्चों के लिए रखी गई हैं। इन मकानों में पाठकों के बैठने का पूरा इंतजाम किया गया है। कुछ मकानों में पाठकों के ठहरने और खाने का भी इंतजाम है। गांव में आने वाले पुस्तक प्रेमियों के लिए सरकार की तरफ से भी हर जगह पर टेबल, अलमारी, कुर्सी, सजावटी छतरी सहित अन्य सामग्री की व्यवस्था की है। गाँव में दो रेस्टोरेंट भी हैं। यहाँ अगले चरण में हिंदी और अंग्रेजी की किताबें भी उपलब्ध होंगी और सरकार 3.5 एकड़ में, एक अत्याधुनिक पुस्तकालय, साहित्यिक कार्यशालाओं के आयोजन के लिए जगह बनाने और योजना बनाने की योजना बना रही है। हालांकि, पुस्तक गांव में डेढ़ लाख किताबें उपलब्ध कराने की योजना है। पुस्तकों के गाँव में ग्राम पंचायत द्वारा महाराष्ट्र सरकार को दी गई जमीन पर करीब २००-२५० रसिक आराम से बैठकर कार्यक्रम का आनंद ले सकें ऐसा ओपन ऐम्पी थिएटर का निर्माण किया गया है । दीवाली, क्रिसमस और गर्मी की छुट्टी में पुस्तक गांव में साहित्य महोत्सव आयोजित किया जाएगा। इसमें नामांकित कवियों को सरकार की तरफ से बुलाया जाएगा। साथ ही गांव के चौपाल पर कथाकथन कविता पठन, कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। यहां आने वाले टूरिस्टों को लेखक, प्रकाशक, और कवियों से परिचित किया जाएगा।‌ नए लेखकों के पुस्तकों के विमोचन के कार्यक्रमों का आयोजन भी यहां पर साल भर किया जाएगा।

बालासाहेब भिलार, एक स्थानीय रहिवासी और 25 मेजबानों में से एक, जिन्होंने अपने घर का एक बड़ा सा हिस्सा मुफ्त पुस्तकालय में बदल दिया है, उन्होने आशा व्यक्त की, कि यह पहल देश में युवाओं के बीच पढ़ने की आदत को बढ़ावा देगी। “इस पहल का उद्देश्य पर्यटन को बढ़ावा देना और गांव को आर्थिक रूप से मदद करना है। लेकिन हमें लगता है कि,‌ यह परियोजना गांव को बदल देगी। इस परियोजना से गांव का वातावरण बदल रहा है। इस गांव का उद्देश्य समृद्ध मराठी साहित्य संग्रह के साथ-साथ स्थानीय साहित्य के प्रेमियों के लिए एकमात्र स्थान उपलब्ध कराना है। लोगों का मानना है, इस योजना के चलते पर्यटक काफी संख्या में यहाँ आकर्षित हुए हैं। जिसका उपयोग पूरी तरह से इस गाँव को हुआ हैं। दूर दूर से लोग यहां की स्ट्राॅबेरी का स्वाद चखने के लिए आते हैं। हर साल टन से ज्यादा स्ट्रॉबेरी-कारोबार से करोड़ों रुपये कमाने वाला ये गाँव, अपने ओर से पूरे देश और दुनिया को शिक्षा का संदेश देना चाहता है और ये कहता है की, हम स्ट्राॅबेरी का स्वाद चखाएंगे, आप अब किताबों स्वाद लीजिए।

भिलार कैसे पहुंचे-
रेल के जरिए-
भिलार के आसपास कोई रेलवे स्टेशन नहीं है, लेकिन यहां से ‌78 कि.मी. की दूरी पर पुने जंक्शन है, वहां से आप महाबलेश्वर,‌‌ सातारा, पंचगनी के लिए बस पकड़ सकते हैं।

रास्ते के जरिए-
महाबलेश्वर,‌‌ सातारा, पंचगनी, पूना से आप भिलार तक रास्ते के जरिए यातायात के किसी भी प्रकार के साधन से जा सकते हैं।

हवाई अड्डे के जरिए-

पूना, कराड़ यह निकटतम हवाई अड्डे है।

About the author

Pratik Dhawalikar

TheatreActor|Writer| Performer|Poet| Artist|Lyricist??I love my India and our mother EARTH.

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